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मुंशी प्रेमचंद ने साहित्य के कंटेंट, नायक , नायिका और विषय वस्तु को बदलते हुए क्रांतिकारी परिवर्तन किया एवं कथा साहित्य को नई दिशा दी। अपनी कहानियों एवं उपन्यास को उन्होंने कल्पना व मनोरंजन से निकालकर यथार्थ से जोड़ा। सरल भाषा, अपने परिवेश के जीवंत पात्र और सामाजिक यथार्थ के चित्रण से उन्होंने साहित्य ,कहानी और और उपन्यास की परम्परा को समृद्ध किया। आपने भारत के मजदूरों के लिए वही किया जो कार्ल मार्क्स ने रूस और अमेरिका के मजदूरों के लिए किया । वे भारत के ऐसे सिपाही थे जिन्होंने बिना बन्दूक और हथियार के अपनी कलम से अंग्रेजों को कंपकंपाया और कलम के सिपाही बनकर भारत को आजादी दिलवाई। वे उस समय में भी अद्भुत वैज्ञानिक दृष्टिकोण वाले समाज वैज्ञानिक थे। उक्त उद्गार प्रोफेसर डॉ संजय जोशी ने जिला लेखक संघ द्वारा आर्य समाज सभागार में आयोजित मुंशी प्रेमचंद जी की जयंती पर मुख्य अतिथि व मुख्य वक्ता के रूप में व्यक्त किए। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला लेखक संघ के संस्थापक गुणवंत गोयल ने करते हुए कहा कि मुंशी जी को समझना है तो आपको उनके उपन्यास पढ़ने होंगे। प्रेमचंद जी बहुत ही ईमानदार, राष्ट्रभक्त और स्वाभिमानी व्यक्ति थे। कार्यक्रम को व्याख्याता आर एस शर्मा, डॉ राजेश मंदोरिया ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में रमेश मोरे, सचिव जगमोहन कटारिया,कोषाध्यक्ष सुरेश शर्मा, कवि धर्मेंद्र शर्मा, साहित्यकार डॉ सुरेन्द्र शक्तावत, लालाराम शर्मा, ऊषा शर्मा, बालकृष्ण सोलंकी, दुल्लीचंद कनेरिया, अथर्व शर्मा इत्यादि उपस्थित थे । संचालन मनोज स्वर्णकार और आभार जगमोहन कटारिया ने किया। |