रतलाम / सैलाना। मध्यप्रदेश में संचालित कोचिंग सेंटरों की मनमानी और विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर अब शासन ने सख्त रुख अपना लिया है। प्रदेश में कोचिंग संस्थानों को व्यवस्थित करने, विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य, सुरक्षा और शैक्षणिक हितों की रक्षा के लिए नए नियम लागू किए गए हैं। अब 50 या इससे अधिक विद्यार्थियों को पढ़ाने वाले प्रत्येक कोचिंग सेंटर के लिए पंजीयन कराना अनिवार्य होगा। इतना ही नहीं, संस्थानों को अपनी सुविधाओं, शिक्षकों की योग्यता, फीस और सुरक्षा इंतजामों से जुड़ी जानकारी भी सार्वजनिक करनी होगी। नियमों का पालन नहीं करने वाले संस्थानों का पंजीयन निरस्त करने तक की कार्रवाई की जा सकेगी।
यह व्यवस्था सर्वोच्च न्यायालय की ओर से कोचिंग संस्थानों में विद्यार्थियों की सुरक्षा और कल्याण को लेकर जताई गई चिंताओं के बाद लागू की गई है। उच्च शिक्षा विभाग के आयुक्त प्रबल सिपाहा ने 28 अक्टूबर को इस संबंध में आदेश जारी किए हैं। आदेश के मुताबिक यह व्यवस्था 23 अक्टूबर 2026 से पूरे मध्यप्रदेश में प्रभावी मानी गई है।
ऑनलाइन पंजीयन, हर शाखा का अलग रजिस्ट्रेशन
नए प्रावधानों के तहत 50 या उससे अधिक विद्यार्थियों वाले कोचिंग सेंटरों को ऑनलाइन माध्यम से पंजीयन कराना होगा। यदि किसी संस्थान की एक से अधिक शाखाएं संचालित हैं तो प्रत्येक शाखा का अलग-अलग पंजीयन आवश्यक होगा। एक बार कराया गया पंजीयन तीन वर्ष तक वैध रहेगा। इसके बाद संस्थान को दोबारा पंजीयन कराना होगा।
नगर निगम से लेकर जनपद पंचायत तक तय होंगे अधिकारी
पंजीयन की जिम्मेदारी भी क्षेत्र के अनुसार निर्धारित की गई है। नगर निगम क्षेत्र में निगम आयुक्त, नगर पालिका एवं नगर परिषद क्षेत्रों में मुख्य नगर पालिका अधिकारी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी पंजीयन अधिकारी होंगे। इन अधिकारियों को संस्थानों की ओर से प्रस्तुत जानकारी और नियमों के अनुपालन की निगरानी का अधिकार रहेगा।
वेबसाइट पर बतानी होगी संस्थान की पूरी जानकारी
अब कोचिंग संचालक विद्यार्थियों और अभिभावकों से महत्वपूर्ण जानकारियां छिपा नहीं सकेंगे।
प्रत्येक संस्थान को अपनी वेबसाइट पर सुरक्षा व्यवस्था, शिक्षकों की शैक्षणिक योग्यता, पिछले वर्षों के विद्यार्थियों के परीक्षा परिणाम, शुल्क संरचना, फीस वापसी की नीति, विकास नीति, हेल्पलाइन नंबर और नियमों के पालन संबंधी घोषणा प्रदर्शित करनी होगी। यदि जांच में गलत जानकारी देना सामने आता है तो पंजीयन अधिकारी संस्थान का पंजीयन निरस्त कर सकते हैं।
CCTV से निगरानी, अग्निशमन और प्राथमिक उपचार अनिवार्य
विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए भी कई महत्वपूर्ण शर्तें निर्धारित की गई हैं। कोचिंग सेंटरों में विद्यार्थियों के बैठने के लिए पर्याप्त स्थान, छात्र-छात्राओं के लिए अलग-अलग प्रसाधन कक्ष, स्वच्छ पेयजल, सीसीटीवी कैमरे, अग्निशमन उपकरण और प्राथमिक उपचार की व्यवस्था अनिवार्य होगी। इसके साथ ही अभिभावकों के साथ समय-समय पर बैठक आयोजित करनी होगी और आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर प्रमुख स्थानों पर प्रदर्शित करना होगा।
आत्महत्या की घटना पर 24 घंटे में देनी होगी सूचना
नए नियमों का सबसे महत्वपूर्ण पहलू विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य और संवेदनशील परिस्थितियों से जुड़ा है। यदि किसी कोचिंग सेंटर में विद्यार्थी द्वारा आत्महत्या या आत्महत्या का प्रयास किए जाने की घटना होती है तो संस्थान प्रबंधन को 24 घंटे के भीतर जिला निगरानी समिति को इसकी सूचना देना अनिवार्य होगा। ऐसे मामलों में संबंधित विद्यार्थी की पहचान और गोपनीयता सुरक्षित रखने के लिए भी पुख्ता इंतजाम करने होंगे।
शिकायत पेटी से लेकर 30 दिन में समाधान तक की व्यवस्था
कोचिंग संस्थानों में अब शिकायत और सुझाव पेटी रखना भी अनिवार्य होगा। विद्यार्थियों की ओर से प्राप्त शिकायतों का अधिकतम 30 दिनों के भीतर निराकरण करना होगा। यदि संस्थान स्तर पर शिकायत का समाधान नहीं होता है तो विद्यार्थी संबंधित पंजीयन अधिकारी के समक्ष अपनी शिकायत प्रस्तुत कर सकेंगे। जांच में शिकायत सही पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जा सकेगी।
नियम बनाना ही नहीं, पालन कराना भी होगी बड़ी चुनौती
उच्च शिक्षा विभाग की यह पहल विद्यार्थियों और अभिभावकों के हित में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। लंबे समय से कोचिंग संस्थानों में सुरक्षा, फीस, सुविधाओं और विद्यार्थियों पर पड़ने वाले मानसिक दबाव को लेकर सवाल उठते रहे हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों में कोचिंग संस्थानों से जुड़े हादसों ने भी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
स्वागत योग्य कदम
उच्च शिक्षा विभाग की कोचिंग सेंटरों पर नियंत्रण की पहल स्वागत योग्य है।अधिसूचना का पालन किस हद तक होता है यह अभी तय नहीं है। दिल्ली जैसी राजधानी में कठोर नियमों को ताक पर रख कर कोचिंग सेंटर चलते हैं,अन्य राज्यों में भी हादसे होते रहते हैं। मध्य प्रदेश में पंजीयन की अनिवार्यता और एहतियात के लिए बने नियमों का पालन करवाना महत्वपूर्ण होगा।अन्यथा ये पंजीयन भी ढाक के तीन पात बन कर रह जाएंगे। (डॉ प्रदीपसिंह राव,पूर्व प्राचार्य,उच्च शिक्षा विभाग)
ऐसे में मध्यप्रदेश में पंजीयन की अनिवार्यता और सुरक्षा संबंधी प्रावधानों से कोचिंग संस्थानों की जवाबदेही तय होने की उम्मीद है। हालांकि, असली परीक्षा इन नियमों को जमीन पर लागू कराने की होगी। रतलाम जिले सहित प्रदेश के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित कोचिंग संस्थानों की जांच, पंजीयन प्रक्रिया और सुरक्षा इंतजामों की नियमित निगरानी जरूरी होगी। यदि अधिकारी केवल कागजी पंजीयन तक सीमित रहे तो यह व्यवस्था भी महज औपचारिकता बनकर रह सकती है। अब देखना होगा कि प्रशासन नियमों का पालन कराने के लिए कितनी गंभीरता से कदम उठाता है।
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत