भोपाल/नई दिल्ली/ रतलाम : व्यापम घोटाले के व्हिसलब्लोअर और पूर्व विधायक पारस सकलेचा ने नीट-यूजी 2026 परीक्षा के अचानक निरस्त किए जाने को बड़े लोगों को बचाने का सुनियोजित षड्यंत्र करार दिया है। उन्होंने केंद्र सरकार और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) पर पारदर्शिता की कमी और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन करने का गंभीर आरोप लगाया है।
सकलेचा ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि 23 लाख विद्यार्थियों की वर्षों की मेहनत, आर्थिक संसाधन और मानसिक स्वास्थ्य को तहस-नहस करने का फैसला बिना ठोस सबूत सार्वजनिक किए लिया गया। उन्होंने मांग की कि परीक्षा निरस्त करने का पूरा प्रस्ताव, रिपोर्ट और केंद्र सरकार को भेजे गए पत्र सार्वजनिक किए जाएं।
यह फैसला कितना व्यापक प्रभाव वाला है, उतने ही स्पष्ट कारण होने चाहिए। एनटीए ने यह मूल सिद्धांत भी नहीं माना सकलेचा ने कहा। उन्होंने इसे व्यापम घोटाले का नया और परिष्कृत संस्करण बताया।
फर्जीवाड़े की श्रृंखला और बड़े लोगों की बचत?
पारस सकलेचा ने आरोप लगाया कि वर्ष 2022 से 2026 तक नीट परीक्षाओं में इम्परसनेशन (पररूपधारण), स्कोरर नेटवर्क, पेपर लीक, उत्तर-पत्रक में हेरफेर, रोल नंबर सेटिंग, फर्जी प्रमाण-पत्र और परीक्षा केंद्र आवंटन में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुईं। इन सबको दबाने और मुख्य आरोपी बड़े लोगों को बचाने के लिए ही पूरी परीक्षा निरस्त कर सीबीआई को सौंपा गया है।
सीबीआई केंद्र सरकार का तोता है। व्यापम घोटाले में भी उसने यही भूमिका निभाई थी सकलेचा ने कहा।
उन्होंने एनटीए की 2 मई की प्रेस विज्ञप्ति का हवाला देते हुए बताया कि सोशल मीडिया पर 65 से अधिक टेलीग्राम चैनलों को ब्लॉक किया गया था और साइबर क्राइम अथॉरिटी को शिकायत की गई थी। फिर भी फर्जीवाड़ा होने का दावा किया जा रहा है। सकलेचा के अनुसार, यह साफ संकेत है कि एनटीए में ही दाल में काला है।
दस्तावेजों में गड़बड़ी का आरोप
सकलेचा ने एनटीए के पोर्टल पर उपलब्ध सूचनाओं की खामियों को भी उजागर किया। उन्होंने बताया कि कई विज्ञप्तियों में तिथियां गड़बड़ हैं। 27 मई की सूचना पहले और 10 मई की बाद में अंकित है। 12 मई की प्रेस विज्ञप्ति के बाद 10 मई का उल्लेख किया गया है। 10 मई की विज्ञप्ति में जारी करने वाले अधिकारी के हस्ताक्षर तक नहीं हैं।
यह योजनाबद्ध तरीके से बाद में सूचना डालने का सबूत है सकलेचा ने कहा।
10 मई की विज्ञप्ति में दावा किया गया कि 3 मई को परीक्षा पूर्ण सुरक्षा मानकों के साथ हुई, लेकिन 7 मई की रात को फर्जीवाड़े का इनपुट मिला। 8 मई को किसी अज्ञात केंद्रीय एजेंसी को वेरिफिकेशन के लिए कहा गया। 12 मई को अचानक परीक्षा निरस्त करने और सीबीआई जांच का फैसला घोषित कर दिया गया। किसी राज्य, किसी केंद्र या फर्जीवाड़े की प्रकृति का कोई स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया। सिर्फ यह कहा गया कि present examination process could not be allowed to stand।
मांग: बेदाग छात्रों को न्याय
पारस सकलेचा ने केंद्र सरकार और एनटीए से स्पष्ट मांग की है कि 3 मई की परीक्षा के परिणाम 21 मई की परीक्षा के साथ घोषित किए जाएं। दागी छात्रों को चिन्हित कर बेदाग विद्यार्थियों को दोनों परीक्षाओं (3 मई और 21 मई) में से बेहतर अंक चुनने का विकल्प दिया जाए। इसके आधार पर मेरिट लिस्ट तैयार की जाए।
उन्होंने कहा कि 23 लाख छात्रों का समय, पैसा और भविष्य प्रभावित हुआ है। पुनः परीक्षा का मानसिक तनाव भी कम नहीं है। ऐसे में पारदर्शी, तर्कसंगत और कारणयुक्त निर्णय लेना एनटीए का विधिक दायित्व था, जो निभाया नहीं गया।
व्यापक असर
नीट-यूजी 2026 की निरस्ती ने पूरे देश में छात्रों अभिभावकों और शिक्षा जगत में गुस्सा और निराशा पैदा कर दी है। कई छात्र संगठन भी पारदर्शी जांच और जल्द समाधान की मांग कर रहे हैं। सकलेचा का बयान ऐसे समय आया है जब परीक्षा प्रक्रिया पर पहले से ही सवाल उठ रहे थे।
पूर्व विधायक ने चेतावनी दी कि यदि पारदर्शिता नहीं बरती गई तो छात्र आंदोलन अनिवार्य हो जाएगा। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि बड़े लोगों को बचाने की बजाय असली दोषियों को सजा दिलाई जाए और पूरे प्रकरण की रिपोर्ट जनता के सामने रखी जाए।
पारस सकलेचा ने अंत में कहा छात्रों का भविष्य राजनीतिक संरक्षण और साजिशों की भेंट नहीं चढ़ना चाहिए। न्याय और पारदर्शिता ही एकमात्र रास्ता है।
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत