सैलाना / सकरावदा : ग्राम पंचायत सकरावदा के ग्रामीणों ने शासकीय भूमि के सीमांकन के लिए तहसील कार्यालय में 13 अप्रैल 2026 को आवेदन प्रस्तुत किया था लेकिन दो महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद संबंधित पटवारी और गिरदावर मौके पर नहीं पहुंचे हैं। इस लंबित कार्य के कारण ग्रामीणों में गहरा असंतोष और असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
ग्रामवासियों की ओर से जारी एक संयुक्त निवेदन में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि सर्वे नंबर 211 एवं 273 की शासकीय भूमि का सीमांकन कराने के लिए विधिवत आवेदन तहसील कार्यालय में जमा किया गया था। आवेदन में भूमि की स्पष्ट पहचान सीमाओं का निर्धारण और ग्रामीण हितों की रक्षा का उल्लेख किया गया था। लेकिन अत्यंत खेद का विषय है कि इतना लंबा समय गुजर जाने के बाद भी न पटवारी और न ही गिरदावर मौके पर पहुंचकर सीमांकन कार्य पूरा कर पाए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि शासकीय भूमि के सीमांकन में हो रही इस अनावश्यक देरी से गांव में कई व्यावहारिक समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। भूमि से संबंधित विवादों को रोकने विकास कार्यों को सुचारू रूप से चलाने और ग्रामीणों के बीच पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सीमांकन अत्यंत आवश्यक है।
ग्रामीणों के मन में यह स्वाभाविक प्रश्न उठ रहा है कि क्या शासकीय भूमि से जुड़े आवेदनों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है? क्या अधिकारियों की व्यस्तता या अन्य कोई कारण है जिसकी वजह से इतनी देरी हो रही है?
निवेदन में संबंधित अधिकारियों से आग्रह किया गया है कि वे सीमांकन कार्य में हो रही देरी का स्पष्ट कारण बताएं और शीघ्रातिशीघ्र मौके पर पहुंचकर सर्वे नंबर 211 एवं 273 का सीमांकन करवाने की कार्रवाई करें। ग्रामीणों का मानना है कि यदि समय रहते यह कार्य पूरा नहीं हुआ तो भविष्य में भूमि संबंधी विवाद और जटिल हो सकते हैं जिसका सीधा प्रभाव गांव की शांति और विकास कार्यों पर पड़ेगा।
स्थानीय स्तर पर इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कई ग्रामीणों ने बताया कि शासकीय भूमि अक्सर अवैध कब्जे या विवादों का शिकार होती है। ऐसे में समय पर सीमांकन न होने से भूमि संरक्षण की प्रक्रिया कमजोर पड़ रही है। ग्राम पंचायत सकरावदा के प्रतिनिधियों ने भी इस मामले में उच्च अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग की है।
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत