रतलाम । व्यापम घोटाले के व्हिसलब्लोअर और पूर्व विधायक पारस सकलेचा ने NEET-2026 परीक्षा घोटाले को व्यापम पार्ट-2 करार देते हुए CBI जांच, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) और केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे मामले में बड़े जिम्मेदारों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है और जांच केवल छोटे आरोपियों तक सीमित दिखाई दे रही है।
सकलेचा ने कहा कि CBI जांच शुरू हुए 80 दिन से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक केवल 13 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है। उनका दावा है कि NTA कार्यालय में किस स्तर पर जांच हुई, किन अधिकारियों से पूछताछ हुई और कौन-कौन से दस्तावेज, कंप्यूटर या हार्ड डिस्क जब्त किए गए, इसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि NTA के 47 संविदा अधिकारियों को हटाया गया, लेकिन उनके नाम, पद और परीक्षा में उनकी भूमिका आज तक सार्वजनिक नहीं की गई। सकलेचा का कहना है कि यदि इन अधिकारियों के नाम सामने आए तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि वे किन संगठनों या विचारधाराओं से जुड़े थे। उन्होंने मांग की कि इन अधिकारियों के नाम, सेवा समाप्ति की शर्तें और जांच में उनकी भूमिका देश के सामने रखी जाए।
पूर्व विधायक ने कहा कि NEET-2022 से 2026 तक व्यापम घोटाले की तर्ज पर पररूपधारण (इम्पर्सनेशन), स्कोरर, पेपर सेटिंग, उत्तर पुस्तिका में बाद में उत्तर भरना, रोल नंबर सेटिंग, फर्जी जाति और मूल निवासी प्रमाण पत्र तथा सेंटर अलॉटमेंट जैसे फर्जीवाड़े होने के आरोप सामने आए हैं। इसके बावजूद पूरे नेटवर्क का खुलासा नहीं किया गया।
सकलेचा ने सवाल उठाया कि 3 मई 2026 को आयोजित NEET परीक्षा से पहले NTA ने दावा किया था कि 551 शहरों और विदेश के 14 शहरों में 5,432 परीक्षा केंद्र, 6,000 ऑब्जर्वर, करीब दो लाख कर्मचारी तथा 22.79 लाख परीक्षार्थियों के बीच कड़ी निगरानी में परीक्षा कराई जा रही है। सोशल मीडिया की निगरानी और 65 टेलीग्राम चैनल ब्लॉक करने का भी दावा किया गया था। इसके बावजूद राष्ट्रीय स्तर का कथित घोटाला कैसे हो गया, इसका जवाब अब तक नहीं मिला।
उन्होंने मांग की कि परीक्षा निरस्त करने के आधार, जांच रिपोर्ट, केंद्र सरकार को भेजे गए पत्र और सभी संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं, ताकि 23 लाख विद्यार्थियों और उनके परिवारों को सच्चाई पता चल सके।
सकलेचा ने कहा कि यदि सरकार पूरे मामले में पारदर्शिता नहीं अपनाती और सभी तथ्य सार्वजनिक नहीं करती, तो यह संदेह और गहरा होगा कि बड़े जिम्मेदारों को बचाने के लिए जांच को CBI के हवाले किया गया है। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली में विश्वास बहाल करने के लिए निष्पक्ष और पारदर्शी जांच आवश्यक है।
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत