रतलाम। सरकारी अस्पतालों की स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ते विश्वास के बीच जिला चिकित्सालय रतलाम ने एक और बड़ी सफलता अपने नाम की है। यहां के अस्थि रोग विशेषज्ञों ने जटिल शल्य चिकित्सा कर एक ऐसे युवक को नया जीवन दिया, जो पिछले कई महीनों से चलने-फिरने में लगभग असमर्थ हो चुका था। सफल ऑपरेशन और बेहतर उपचार के बाद अब युवक न केवल अपने पैरों पर खड़ा हो गया है, बल्कि सामान्य रूप से चल भी रहा है।
सिविल सर्जन डॉ. ए.पी. सिंह ने बताया कि राजस्थान के बांसवाड़ा जिले के ग्राम छायन बड़ी निवासी 24 वर्षीय गोरधन पिता नानजी गत वर्ष अक्टूबर में सड़क दुर्घटना का शिकार हो गए थे। दुर्घटना में उनके पैर की हड्डी गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गई थी। प्रारंभिक उपचार के बाद जिला चिकित्सालय बांसवाड़ा एवं एक निजी अस्पताल में उनका ऑपरेशन किया गया, लेकिन हड्डी सही तरीके से नहीं जुड़ सकी। लगातार तीन माह तक उपचार के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ। पैर टेढ़ा हो गया और चलना-फिरना बेहद कठिन हो गया। हालत बिगड़ने पर उन्हें उदयपुर या जयपुर जैसे बड़े चिकित्सा केंद्रों में उपचार कराने की सलाह दी गई।
करीब छह से सात माह तक दर्द और परेशानी झेलने के बाद गोरधन को जिला चिकित्सालय रतलाम में पदस्थ अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. भरत निनामा के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद वे उपचार के लिए रतलाम पहुंचे। यहां डॉ. भरत निनामा और डॉ. अभिनव जैन ने विस्तृत जांच कर पाया कि पैर की हड्डी गलत तरीके से जुड़ चुकी है और मरीज को सामान्य जीवन देने के लिए दोबारा जटिल ऑपरेशन करना आवश्यक है। चिकित्सकों ने ऑपरेशन की पूरी प्रक्रिया, संभावित जोखिम और उपचार की जानकारी परिजनों को दी तथा उनकी सहमति मिलने के बाद शल्य चिकित्सा की योजना बनाई।
मई माह में विशेषज्ञ टीम ने सफलतापूर्वक जटिल ऑपरेशन किया। ऑपरेशन के दौरान एनेस्थीसिया की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी डॉ. महेश मौर्य ने निभाई। ऑपरेशन के बाद चिकित्सकों की सतत निगरानी, नियमित उपचार और पुनर्वास के चलते लगभग एक माह में गोरधन का पैर पूरी तरह ठीक हो गया। अब वह बिना किसी बड़ी परेशानी के सामान्य रूप से चल-फिर रहे हैं।
स्वस्थ होने के बाद गोरधन और उनके परिजनों ने जिला चिकित्सालय रतलाम के चिकित्सकों और पूरे स्टाफ का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जब अन्य स्थानों पर उम्मीद टूट चुकी थी, तब रतलाम के डॉक्टरों ने उनकी जिंदगी बदल दी। जिला चिकित्सालय की यह सफलता न केवल चिकित्सकों की विशेषज्ञता का प्रमाण है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि सरकारी अस्पतालों में आधुनिक उपचार, अनुभवी विशेषज्ञों और समर्पित चिकित्सा टीम के माध्यम से जटिल मामलों का भी सफल इलाज संभव है।
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत