|
1977 में शुरू हुई छोटी पहल आज 10 राज्यों तक पहुंची मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने वर्चुअल संबोधन में संस्था की पांच दशकों की यात्रा को प्रेरणादायी बताते हुए कहा कि वर्ष 1977 में तमिलनाडु के कोयंबटूर में डॉ. आर.वी. रमणी और डॉ. राधा रमणी ने जरूरतमंदों की सेवा के उद्देश्य से इस पहल की शुरुआत की थी। एक छोटी सी शुरुआत आज देश के 10 राज्यों तक पहुंचकर व्यापक सेवा नेटवर्क का रूप ले चुकी है। पांच दशकों तक सेवा के संकल्प को निरंतर निभाना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। 80 प्रतिशत जरूरतमंदों को मुफ्त इलाज सेवा बना संस्था की पहचान मुख्यमंत्री ने शंकरा आई फाउंडेशन के सेवा आधारित चिकित्सा मॉडल की विशेष रूप से सराहना की। उन्होंने बताया कि संस्था लगभग 80 प्रतिशत जरूरतमंद मरीजों को निःशुल्क नेत्र चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराती है जबकि शेष 20 प्रतिशत मरीज उपचार के लिए भुगतान करते हैं। यह व्यवस्था चिकित्सा सेवा को आर्थिक स्थिति से ऊपर रखते हुए जरूरतमंदों तक बेहतर उपचार पहुंचाने का महत्वपूर्ण उदाहरण है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी समाजसेवा और जनकल्याण के कार्यों के लिए निरंतर प्रेरित करते हैं। प्रदेश सरकार मेडिकल कॉलेजों एंबुलेंस सेवाओं और ट्रॉमा सेंटरों का विस्तार कर स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत बनाने की दिशा में लगातार प्रयासरत है। शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। पांच लाख बच्चों की आंखों की जांच का लक्ष्य समारोह में संस्था के संस्थापक पद्मश्री डॉ. आर.वी. रमणी ने नेत्र स्वास्थ्य के क्षेत्र में संस्था के प्रयासों और आगामी योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संस्था द्वारा रेनबो स्क्रीनिंग प्रोग्राम के माध्यम से पांच लाख बच्चों की निःशुल्क नेत्र जांच का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस पहल का उद्देश्य बच्चों में दृष्टि संबंधी समस्याओं की शुरुआती अवस्था में पहचान करना और समय रहते उन्हें उचित उपचार एवं मार्गदर्शन उपलब्ध कराना है। बच्चों की आंखों की समय पर जांच और दृष्टि संबंधी समस्याओं का शुरुआती स्तर पर पता लगाना उनके बेहतर भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। संस्था की यह पहल बाल स्वास्थ्य और शिक्षा दोनों की दृष्टि से महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। सेवा के पांच दशक आगे भी जारी रहेगा रोशनी बांटने का संकल्प शंकरा आई फाउंडेशन इंडिया की गोल्डन जुबली ने यह संदेश दिया कि यदि चिकित्सा सेवा को व्यावसायिक सीमाओं से आगे बढ़ाकर मानवीय जिम्मेदारी के रूप में अपनाया जाए तो समाज के अंतिम व्यक्ति तक भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाई जा सकती हैं। पांच दशकों की उपलब्धियों के साथ संस्था ने आने वाले समय में नेत्र स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा बढ़ाने और अधिक से अधिक जरूरतमंदों तक उपचार पहुंचाने का संकल्प दोहराया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संस्था को गोल्डन जुबली की शुभकामनाएं देते हुए विश्वास जताया कि शंकरा आई फाउंडेशन भविष्य में भी इसी सेवाभाव और समर्पण के साथ मानवता की सेवा करती रहेगी। समारोह ने पांच दशकों की गौरवशाली यात्रा को सम्मान देने के साथ ही समाज के हर जरूरतमंद व्यक्ति तक आंखों की रोशनी और बेहतर जीवन पहुंचाने का नया संकल्प भी मजबूत किया। |